Thursday, 14 July 2016

प्रश्न बनकर रह गया हमारा जीवन

प्रश्न बनकर रह गया हमारा जीवन  

-From google
जब टूट गये थे तार हमारे
रिश्तों पर संवाद हमारे
भीग गया था प्रेम पत्र
ख्वाबों में दूरी दिखती थी
था आसमान में एक तारा फिर भी  
प्रेयशी को प्यारा लगता था  
रात चांदनी में, वह उसके   
रोज उजाला लेकर आता
राहों में उसके दिखता था
बारिश की बूंदों में वह बिखरा
गर्मी के मौसम में वह एक तारा
खोकर भी वह उभरा था
अचानक बारिश में ही आज प्रियतमा
मेरी आँखों में समा गयी
निःशब्द हुआ जब तारा वह
देखा अपनी प्रेयशी को
न उसके जज्बात मिले उससे
न भावों की उसके बरसात दिखी
चली गयी अब वह दूर कही
लगता है, नहीं है प्रेम की डोर बंधी  
फिर छुप गया मैं एक तारा बन वही
बरसात में और विरह के आकाश में
प्रश्न बनकर रह गया हमारा जीवन  
क्यों नहीं हो गया प्रकाशमय .................
-प्रभात 

Tuesday, 5 July 2016

अरे वो छोटू

अरे वो छोटू 
-Google
अरे वो छोटू गोलगप्पे देना
सुनता नहीं क्या
मांगने वाला भी तो लड़का था
बिलकुल गोलगप्पा सा, बौना, मोटा
अच्छे खानदान का लगता था
कार से उतरा था
छोटू तो गोलगप्पा ही दे सकता था
पहले देखा सामने,
बड़े प्रेम से आँखों से निहारा
शायद उसे गोलगप्पे से प्रेम था
गोलगप्पा से क्योकि 
गोलगप्पा था तो गोरा और ऊपर से चश्मा
दे दिया जल्दी है गोलगप्पा
बोला साहेब कैसी लगी 
उलटे जवाब आया, थोड़ी मिर्च कम डाल
सभ्यता किसमें है छोटू में न
जिसने पढायी नहीं की है।
और गोलगप्पे ने बताना चाहा
कुछ कहकर
अरे 'फाइव हंड्रेड का चेंज होगा छोटू'
उसने कहा मतलब फफिफ्टी का 
वो तो नाही साहेब
गोलगप्पे की ये शिक्षा किस काम की
केवल साहेब कहलवाने की
छोटू के पास संस्कार है और
थोड़ी मेहनत, थोड़ा हिसाब
और शिक्षा गोलगप्पे के पास
काश दोनों ही किसी को मिल जाती 
हमदर्दी है मेरी, छोटू को मिले
अगर छोटू पाये तो शायद खिल जाए भारत
और अगर किस्मत गोलगप्पे के पास हो जाये
तो भारत के हाल यही रहेंगे जैसे है
विकासशील भी नहीं कहलायेंगे
जैसे अब है ये हाल और 
गोलगप्पे दौलत पर खरीदते जाएंगे
घर, जमीन, स्कूल, इंसान, और एक दिन
देश बेच देंगे!!!!
-प्रभात



माँ मुझे गोंद में फिर आना है

माँ मुझे गोंद में फिर आना है
-Google
माँ मुझे गोंद में फिर आना है
बारिश से मुझे बचा लो
गोदी में अचरे से छुपा लो
आँखों में कजरा लगा दो
सुबह मुझे स्नान करा दो
पढ़के स्कूल से थके आना है 
माँ मुझे
★★★
डांट मिली तो दुलरा दो
चम्पक दे मन बहला दो
शाम हुयी तो दूध पिला दो
चांदनी रात में कथा सुना दो 
खिलौने पाने की जिद करना है 
माँ मुझे
★★★
जो मैं खाऊं वही बना दो 
बात बात में मुझे हंसा दो 
रोते हुए मुझे बहला दो
सरसों से लेपन कर दो
भूत न आये छुप जाना है
माँ मुझे
★★★
-प्रभात


मैं खुश हूँ अपने जीवन से

मैं खुश हूँ अपने जीवन से


मैं खुश हूँ अपने जीवन से
तुम कहते हो कुछ ऐसे
जैसे मैं परेशान हूँ।
मैंने जो कुछ किया पिछले वर्षों में 
उनका रिकॉर्ड मांगते तुम हो
पर मैं उनमें से हूँ 
जिनका जवाब है 'कुछ नहीं'
और फिर तुम खुश हो जाते हो।
सच बताऊँ मैं जो हूँ,
उसका रिकॉर्ड दिखाने को नहीं है
तुम्हे, इतना जरूर है
ईश्वर ने हमेशा मुझे देखा है।
इसलिए मैं विचलित नहीं हुआ कभी
आपाधापी के दिनों में,
अच्छे दिनों से भी,
कुछ तुम्हारी बातों से,
जिसने मेरा अपमान किया।
मैं रोया कई बार हूँ,
मगर झुका कभी नहीं तुम्हारे सामने।
नसीब मेरी दुःख के ,
या असफलताएं मुझे प्रसन्न करती है। 
मैं अमीर नहीं हूँ,
तो क्या ?मैं जी रहा हूँ।
सब कुछ लेकर ही,
कुछ भी तो कमी नहीं है,
उदास दिनों को अब झेल सकता हूँ,
पहाड़ भी मैं काट सकता हूँ,
बाधाएं चाहे जैसी हो,
मैं पार पा सकता हूँ।
सही गलत की परख कर,
निर्णय ले सकता हूँ,
और अन्याय से अकेले लड़ सकता हूँ।
तुमसे मैं हर चीज़ में आगे हूँ,
इंसानियत के नाम पर,
जज्बातों के नाम पर,
मैं भीड़ का हिस्सा नहीं हूँ।
अकेले ही काफी हूँ।
कुछ तुम्हारी गलतफहमियां है.....
मुझे सादगी ही पसंद है,
मैं रंगीन नहीं बनना चाहता।
मुझे सामान्य जीवन पसंद है,
मैं अमीर नहीं बनना चाहता।
मुझे आत्मनिर्भर बनना है,
मैं नौकर नहीं बनना चाहता।
मुझे मेरा रास्ता पता है,
मैं तुमसे अहसान नहीं लेना चाहता।
और मुझे सच बोलना पसंद है,
मैं इसलिए कहीं लिखता हूँ,
और बिना किसी की परवाह किये 
सामने ही कहता हूँ ।
पता है अच्छा नहीं लगता इस दुनिया को,
सच और मेरे त्याग की कहानी,
पागलपन उनके शब्दों में
पर ठुकराया तुमने ही तो है हर जगह से,
तभी मैं इस लायक बना हूँ,
कि मैं जाते जाते कह सकूँ,
मैं खुश हूँ अपने जीवन से।
-प्रभात