Monday, 23 September 2019

कुछ कहूँ तो समझो यकीन कुछ न होगा

कुछ कहूँ तो समझो यकीन कुछ न होगा
बेजुबान समझो अब और कहना न होगा


मेरी तरफ देखो उम्रभर के लिए एक नजर
कुछ और क्या कहूँ कभी बिछड़ना न होगा

#प्रभात

Prabhat Prabhakar

जितना कि मीरा और कृष्ण का...


तुम मेरे पास न आना
और मैं तुम्हारे पास भी नहीं
दूर रहना इतना दूर जितना कि पृथ्वी और आकाश
इतना कि जितना कि मेरी प्यास और समंदर का पानी
इतना कि अपाहिज और शक्तिमान

इतना दूर कि माउंट और मारियाना
और तब मैं तड़पूंगा और एक दिन हार मान जाऊंगा
मैं इंसान बन जाऊंगा
फिर मैं कुछ न कहूंगा
लेकिन प्यार मेरा वही होगा
जितना कि भक्त और भगवान का
जितना कि मीरा और कृष्ण का...



वो खौफनाक मंजर


वो खौफनाक मंजर
वो तूफानी रातें
वो बेकरारी
सब कुछ भूल जाएगा
एक दिन आएगा
चिल्लाती रूहों में
संवेदनाओं का तड़पना
जागृत एहसासों का
टूटना और बिखरना
सनी यादों के साये में
पल-पल पलटना
सब कुछ सिमट जाएगा
एक दिन आएगा
जलते ख्वाबों की
लपटों में खुद को झोंकना
तस्वीरों के इर्द गिर्द जाना
और खुद से ओझल हो जाना
आत्मीयता के बहाने
टेढ़े मेढ़े अक्षरों को सहेजना
सब कुछ जल जायेगा
एक दिन आएगा
बोझ हल्के हैं अभी सहन हो जाएगा
इश्क़ अधर में है दफन हो जाएगा
वक्त की लपेटों से जागना चाहोगे
क्या पता सब कुछ सही हो जाएगा
लेकिन
पीड़ाओं के गट्ठर में खुद को न उठा लेना
मुस्कुराहटों को अपने अधर से न हटा देना
जिंदगी है, जान न देना
सब कुछ खत्म हो जाएगा
एक दिन आएगा
तस्वीर: गूगल साभार


बर्फ टूट रहा है


एकता में शक्ति है। इंसान वो इंसान कहाँ जो इसे टुकड़ों में हिन्दू मुसलमान करके देखता है।
भारत जिसे हम देख रहे हैं आलोचना कर रहे हैं। शायद अब वो इस कदर लगता भी है जब कुछ सामाजिक घटनाएं जिसके लिये हम खुद जिम्मेदार हैं वो तो है ही, कुछ को बढ़ावा देने के लिए राजनैतिक गतिविधियां भी जिम्मेदार हैं।

आज हम भक्त हैं मोदी के, राहुल के और केजरीवाल के लेकिन हम अपने सामाजिक उत्तरदायित्यों को न तो समझते हैं और न ही उनके लिये लड़ना चाहते हैं ना ही निष्पक्षता के साथ उनके भक्त बनना चाहते हैं। आज हर कोई टूट रहा है।
आम के पेड़ टूट रहे हैं
बरगद सूख रहा है
सड़कें टूट रही हैं
मुहल्ला टूट रहा है
बच्चा टूट रहा है
आदमी टूट रहा है
खिलौने टूट रहे हैं
मकान टूट रहे हैं
धर्म टूट रहा है
न्याय टूट रहा है
पैसा टूट रहा है
जिंदगी टूट रही है
अस्पताल टूट रहे हैं
महिलाएं टूट रही हैं
बर्फ टूट रहा है
और सब टूट कर पानी..........
अंत में पानी ही हो जाना है सब कुछ।
तस्वीर क्रेडिट - प्रभाकर