Monday, 8 June 2015

मगर मेरे हौंसले मेरे जाने के बाद की सोंच लिए बैठे है..

है राह नही आसान किसी इंसान के
मगर स्वप्न किसी पंक्षी के पर लिए बैठे है

रेतीली,  कटीली और पथरीली राहों पर
कुछ मधुमक्खियाँ फूलों का रस लिए बैठे है

अनजानी दुर्गम पहाड़ियां कभी खिसकते है
मगर मेरी सफ़र में ये नदियों में रास्ता बना बैठे है

प्यार-मुहब्बत से दूर दिनों में बस लगता है
कुछ झीलें पानी नमकीन लिए बैठे है  

विस्तार हुआ है अब तक बहुत ज़िंदगी का
मगर मेरे हौंसले मेरे जाने के बाद की सोंच लिए बैठे है ......


-प्रभात 

Saturday, 6 June 2015

जो केवल एक हंसी का रिश्ता जानता है....

मुझसे जो माँगा मैंने दिया
ये सोंचकर तो नहीं कि मिलेगा
और आपने लिया ये सोंचकर
कि कभी लौटाना नहीं मुझे
कितनी बेकार है ये दुनिया मेरी
मैंने माँगा भी कुछ एक बार अगर
मुझे मिला मगर बदले में उस चीज के
जिसे मैंने भुला दिया था
और उसके साथ ही एक सच
मगर कड़वी बात, जिसे मैं जानता तो था  
कि तुम विकसित मानव ही हो और
तुम केवल कुछ देते हो नोट के बदले में
तुमसे सही है वह तुम्हारा नादान बच्चा
जो केवल एक हंसी का रिश्ता जानता है
और खुशी से कुछ मांगने पर
अपने आपको ही गोंद में रख देता है किसी गैर के.


-प्रभात 

Friday, 5 June 2015

सम्मान रहा न ईमान रहा!

सम्मान रहा न ईमान रहा, बस बेचने वाला इंसान रहा
Ref. Google.com

दौलत घर की और खुदा की, बनकर केवल अभिशाप रहा

पानी के प्यासे जीवित प्राणी को, बस आंसू का अहसास रहा

हो रहे जगत में प्रतिस्पर्धा, बाहों का बाहों से दुराव रहा

न रहा प्यार किसी कोने में, बस वैलेंटाइन वाला दिन रहा

-प्रभात