Thursday, 21 May 2015

यूँ ही...


14 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (22-05-2015) को "उम्र के विभाजन और तुम्हारी कुंठित सोच" {चर्चा - 1983} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
    ---------------

    ReplyDelete
  2. सुंदर,प्रेरित करती हुई.

    ReplyDelete
  3. हौसलों के उड़ान बहुत लम्बी होती है ...
    बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  4. सुंदर प्रेरणात्मक

    ReplyDelete
  5. हौसले बुलंद होना चाहिये, फिर मंजिल तो अपने आप मिलती है।

    ReplyDelete
    Replies
    1. विचार प्रकट करने के लिए शुक्रिया आपको!

      Delete

अगर आपको मेरा यह लेख/रचना पसंद आया हो तो कृपया आप यहाँ टिप्पणी स्वरुप अपनी बात हम तक जरुर पहुंचाए. आपके पास कोई सुझाव हो तो उसका भी स्वागत है. आपका सदा आभारी रहूँगा!