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Tuesday, 1 June 2021

कर लो सारी संपत्ति सीज महामहिम

कर लो सारी संपत्ति सीज महामहिम

मैं तो चिल्लाऊंगा सिस्टम कोलैप्स हो गया

मेरी गुड़िया नहीं रही, मेरी पत्नी नहीं रही

मैं तो भड़काउंगा सब बिना इलाज हो गया

सुबह ही डॉक्टर ने माना कोविड नहीं

फिर नो मोर का सिग्नल देने आ गए

सुबह ही कार से आये थे छोड़ने

और अब अर्थी उठी है

सुबह ही सुबह ही सुबह ही सब गजब हो गया

घर में कोई नहीं बचा, सब अनाथ हो गया

माता जी तो मुंह से फूंक भरती रही हैं साँसों के लिए

आज वो बाप भी बहुत दूर निकल गया

कोई सिलेंडर लाते लाते निकल गया,

कोई कांधे में लादे लादे निकल गया



हैरत में हूँ कि कुर्की जब्ती में लाशों का कोई मोल नहीं सरकार!

क्या कुछ बचा है वही लूट लो अबकी बार

अच्छा बैठे हो गद्दी पर जब तक बैठे रहो

तुम्हारी दुकान तक कोई तो आएगा ही सही!

तुमको लाशों से सजाने कोई आएगा ही सही!

......

#प्रभात

Prabhat

25-04-21

Monday, 25 May 2020

अभी दूर की बात है


अभी दूर की बात है माचिस की तीली और उसका छू जाना उसकी सतह से यहां
लेकिन चिंगारी निकलते हमने कहीं तो देखा है...
हां बहुत से देश हैं ऐसे ही जहां 'वायरस' का छूना बाकी है
ये ऐसे है जैसे कि चिंगारी से फैली हुई है आग कुछ दूरी पर
उस आग को हम भी देख रहे हैं उलट पुलट कर
शायद कह रहे हैं कुछ लोग अभी
कि बहुत दूर है
यहां आना मुश्किल है
कुछ कह रहे हैं आएगा भी तो हमारे घर तक पहुंचना मुश्किल है
कुछ तो कह रहे हैं अब कर लिया जतन, अब कुछ करना ही मुश्किल है
दिन रात उथल पुथल और उसकी मीडिया की बकैती में
हम परेशान हैं इस पर कि
माचिस किसने दी, किसने रगड़ा सलाई, किसने छुई सतह, किसने फैलाई आग और किसने जलाई ये दुनिया
और फिर भी हम देख रहे हैं उस फैलती आग को
कैसे बचें, क्या करे उससे बहुत दूर निकलकर
एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप और नफरतों के बयार में
कुछ सुलगा रहे हैं इंसानियत की बीजों को ताकि खत्म हो जाएं इंसान,
उससे पहले ही कि दूर तलक लगी आग पास पहुंचे
अभी भी मीडिया में मंडराते पतंगे उसी लौ में जलने को तैयार हैं
दूर से आमंत्रित कर रहे हैं औरों को भी
और अभी भी जब वह आग बहुत करीब आ गई है
बेपरवाह है मीडिया, जनता, और सरकार
बस दिख रहा है
कहीं कोई भिनभिना रहा है
कहीं कोई जला रहा है
कहीं कोई बजा रहा है
और कहीं कोई बजवा रहा है, जलवा रहा है...
कहीं अब आग पहुंचने से पहले ही सब कुछ खाक न हो जाये....!

#प्रभात

Prabhat