बांसुरी
की ध्वनि मेंजब झंकार उठे मन से
वीणा की धार में सारी
जब श्रृंगार सजे मन से
तो प्रिये तुम आना बस
ठहर जाए जमाना बस
मिलन
की अप्रतिम छवि
दौड़ उठे गईया तब
आंगन में फूल खिले
हवा छू जाए हृदय जब
मौन हों नदियां सारी
चाँद तुम दिखो तब
तो प्रिये तुम आना बस
दौड़ उठे गईया तब
आंगन में फूल खिले
हवा छू जाए हृदय जब
मौन हों नदियां सारी
चाँद तुम दिखो तब
तो प्रिये तुम आना बस
देखना तुम तिरछी नजरों से
मुस्काना तुम झुके अधरों से
तितलियां उड़ जाएं जब
भौरें मचल जाएं तब
जुगनुओं के आने से पहले
तुम चली आना
गीत कोई गुनगुनाना
मुस्काना तुम झुके अधरों से
तितलियां उड़ जाएं जब
भौरें मचल जाएं तब
जुगनुओं के आने से पहले
तुम चली आना
गीत कोई गुनगुनाना


