Showing posts with label बस यूँ ही. Show all posts
Showing posts with label बस यूँ ही. Show all posts

Tuesday, 3 April 2018

बस यूँ ही


परेशानियां तो हर किसी के पास हैं। कोई बता देता है तो कोई छिपा लेता है। चेहरे के भावों को जिससे पढ़वाना चाहते हैं वो नहीं पढ़ पाता और जिसे नहीं तव्वजो देते वो आपके हर सुख दुख की कहानी पढ़ता जाता है।

जिसे हम जितना दूर फेंकना चाहते हैं वह उतना ही करीब उड़ कर आ जाता है। हवा भी उसका साथी बन जाता है। लेकिन जिसे हम पास देखना चाहते है वह टूट कर बिखेर दिया जाता है या फिर खुद ही बिखर जाता है। उसे हर कोई हासिल भी करना चाहता है, हवा को उड़ाने के लिए कुछ बचता ही नहीं है। कोई चीज जितनी सुंदर हो या मनमोहक, जिससे प्रेम हो जाए..उससे अलगाव होना उस सौंदर्य की गाथा में निहित है। खुशियां किसी भी चीज को हासिल करने के बाद अगर आती हैं तो वह खुशी नहीं बल्कि स्वार्थ सिद्धि होने में जाया की गई ख़ुशियों को पुनः पा लेना है लेकिन असली खुशी तो तब है जब वह परेशानियों के साथ ही उसमें खुश रहने की वजह ढूंढ़ लेता है।
तस्वीर: गूगल साभार


Friday, 23 March 2018

बस यूँ ही ...


एक रास्ता आज भी है बाकी
डर रहा हूँ, अकेले चलने से??
आंसुओं की चादर पर सोने से??
किताबों में धुँधले शब्द पाने से
बेचनियों में यादों को खोने से???
सुनों,
चाहता हूं मदिरा, पिला दे साकी 
एक रास्ता आज भी है बाकी......
------

मत रोको छटपटाहट को, हंसने वालों को अभी हँस लेने दो
कल उन्हें अपनी हँसी भी याद आएगी और तुम्हारा दर्द भी।
---
वक्त की करवट ने जमाना बदल दिया 
रात की नजरों ने कैसे मुँह फेर लिया
एक हकीकत ही है अब तुम्हारे सामने
बहुत मुश्किल है मनाना खुद को
कि तुम नहीं हो मेरे सामने............
...
वो चाँद का दीदार करें तो कैसे
जिंदगी को शायद मंजूर नहीं था
हौसलों को ताकत देने के सिवा
सफर में खुद को तनहा करें तो कैसे
...
अक्सर बेजुबान होते देखा है खुद को
किसी की परछाई भर सामने आ जाये तो
बस हवा की सरसराहट खींच ले जाती है
बहुत दूर .....इतना दूर कि..
शायद खो जाता हूँ तुम्हारा हाथ पकड़े भी
...
अक्स भी क्या कमाल की है खुदा
जिसकी तस्वीर लगाता हूँ दीवाल पर
वो नजर से ताल्लुकात ही नहीं रखते
एक इमेज है जिसे मैं डिलीट कर देता हूँ
लेकिन ये वायरस है जो दिल से नहीं जाता


-प्रभात