फाल्गुन मास और वसंत की सुन्दर बेला
रंगीन नैसर्गिक जीवन के साथ
इस रंगीन त्योहार का सुन्दर मिलन
पुष्प के सुन्दर फूलों के साथ
खिलखिलाकर कुछ कहने की अभिलाषा में
प्रकाशमान नभ की ओर एकटक देखने का हुआ
मानों प्रभात की अनुपम दृश्य के साथ
प्रभात की एकटक निगाहें शरमा गयी
बाल क्रीड़ा करते तबस्सुम की इत्र
मेरे रूह को निस्संदेह खुशबू दे गयी
ब्रज की होली सा सुन्दर अहसास के साथ
साभूषण राधा की पिचकारी से रंगे प्यारे मोहन
मेरे आँगन में किलकारिया ले रहे
मोहन की हास और क्रोध का मिलन हुआ
रंगों से डूबी बाल्टी नन्हे बछड़े को रंग गयी
गऊ परिवार होरी की खुशियों के संग
प्रभाकर की छिति की ओर गंभीरता से
अचरज का अनुपम उदाहरण हमें सौंप गयीं
मानों अब हो रहा दिवाकर का परिहास
विश्राम की मुद्रा में आकाश की बाहों में
रंगी हर तरफ दुनिया की परछाई में
राधा सौप रही सुन्दर गुझिया सा व्यंजन
यूँ तेजहीन प्रकाश की ओट में मोहन
की प्यारी बांसुरी की गूँज और
ब्रज सा विस्तार लिए गाँव के नगाड़े संग
नर और नारियों का मनोहर नृत्य हुआ
होली की इस विशुद्ध सुअवसर में
तसव्वुर की अंतर्मन की उड़ान सभी को
होली पर शुभकामनाएं देने संग चल पड़ा
बहुत सारी प्यार की रस्मों को रंग मिलाता हुआ
-प्रभात
