मुझे
राहों में खिला समझ लो
तुम
राही नजरअंदाज कर लो
या
चाहो तो मेरा गम समझ लो
मेरा
जीवन तुमसे अच्छा है
समझने
वाले खुद से समझ लो
पैरों
से नहीं पर से समझ लो
तुमसे
अच्छा मेरा जीवन है
थोड़ा
अपने को तुम खुश रख लो
बस
आगे बढ़ने की बात हो जब
निश्चल
सोच से तुम निकल लो
मुझे
काटों में चुभा समझ लो....
-प्रभात
