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Tuesday, 2 August 2016

दर्पण

दर्पण
 from -google
हाँ जिसमें दिखता हूँ खूबसूरत मैं
मुझे वही दर्पण पसंद है.... 
शर्त हैं उस आईने की,
कि मुझे अहसास दे 
सुन्दर भावों की,
मधुर स्वभावों की,
सरल विचारों की
जिससे प्रकट हो सके 
एक पूर्ण मुस्कान मेरे चहरे पर
मुझे वही चेहरा पसंद है 
हाँ जिसमें दिखता हूँ खूबसूरत मैं 
मुझे वही दर्पण पसंद है....
पर चाहता तो हूँ 
कभी कभी मुझे दिखाना 
उस हकीकत को 
जिसमें मैं होता हूँ
वास्तविकता के करीब, 
रंग व बनावट के पास,
झुर्रियों के नजदीक, 
निर्बल काया के समीप,
देख सकूँ गुण और अवगुण अपने 
और बदल सकूँ खुद को 
क्योंकि बिखेरना चाहता हूँ 
तुम्हारे लबों पर भी मुस्कराहट 
कहता हूँ इसलिए ही तो 
मुझे वही दर्पण पसंद है.... 
हाँ जिसमें दिखता हूँ खूबसूरत मैं 
मुझे वही दर्पण पसंद है.... 
-प्रभात 
(राष्ट्रीय समाचार पत्र (हमारा मेट्रो) में प्रकाशित रचना)