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Sunday, 16 October 2016

थाम कर मेरा हाथ

थाम कर मेरा हाथ 
चलती रहोगी न
छोड़ जाओगी मुझे 
कभी क्या अकेला
नहीं। यही कहोगी
जानता हूँ 
कहती रहोगी न
मैं भटक जाऊं
चलते चलते कहीं
मुझे ढूंढ लोगी न
वर्षों न हो मुलाकात
तो मेरे आने का 
इंतज़ार करोगी न
मैं लिखता हूँ सब
प्यार की कलम से
तुम पढ़ती रहोगी न
भावों की बारिश में 
भीगकर हर वक्त
मुस्कुराती रहोगी न
थाम कर मेरा हाथ
चलती रहोगी न
-प्रभात
तस्वीर: गूगल से साभार