तुम रहते हो कितने पास मगर मेरे साथ नहीं होते
तुम गाते हो कितने गीत मगर मेरे गीत नहीं होते
तुम गाते हो कितने गीत मगर मेरे गीत नहीं होते
लिखते हो सब कुछ वैसा जैसे मेरा ही वर्णन हो
कहते हो मुझसे वही बात जिसमें अपनापन हो
कहते हो मुझसे वही बात जिसमें अपनापन हो
पर करते हो कितनी बात मगर मेरे बात नहीं होते
शायद होते है वही जज्बात मगर ख्याल नहीं होते
शायद होते है वही जज्बात मगर ख्याल नहीं होते
तुमने देखा था मुझे खूब कभी मेरी राहों में आकर
मैंने सोंचा था तुम्हें खूब तुम्हारी राहों पर जाकर
मैंने सोंचा था तुम्हें खूब तुम्हारी राहों पर जाकर
हम करते है तुमसे प्यार मगर मेरे साथ नहीं होते
आते हो अब भी पास मगर मुलाक़ात नहीं होते
आते हो अब भी पास मगर मुलाक़ात नहीं होते
तुम जानते हो सारी बात मगर कुछ नहीं कहते
होते और करते हो उदास मगर बात नहीं कहते
होते और करते हो उदास मगर बात नहीं कहते
-प्रभात