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Monday, 23 May 2016

तुम आ ही गए

तुम  ही गए
गूगल से साभार 


बस तुम्हारा ही इंतजार था
तुम  ही गए
शीतलता का एहसास कराने
तरसती बूंदों से भिंगोने
जिनसे हमने छुआ था एक दूसरे को
इसी तपती दोपहरी के बाद
मिले थे माटी की खुशबू के साथ
जिसमें हमारे पसीने की कुछ बूंदे थी
कुछ प्रेम के आंसू
और कुछ बूंद
गगन से  छूटा हुआ जहाँ देखते ही
तुम  ही गए
उसी समर्पण के साथ
मेरे पास आँखों से बहुत दूर
पर दिल के पासमेरे साथ
चलते हुए लगता है
चल रहा हूँ साथ तुम्हारे
तुम्हारी मधुर आवाज के साथ
भींगे पत्तों को छुआ लगता है
तुम  ही गए
मेरे प्रेम को जीवंत कराने
तभी तो चला जा रहा हूँ
मृग की भांति ही
पर अब वो खूबसूरत अदा
नाभि का इत्र
सब जैसे मेरे ही सिरहाने है
तभी तो अब मैं सोऊंगा
कुछ अच्छे ख्वाबों के साथ
फिर कहूँगा यहाँ भी
तुम  ही गए
-प्रभात