हम चाहते है जिसे खुश रखना
वो हमीं को खूब रूला रहे हैं
वो हमीं को खूब रूला रहे हैं
जो भुलाए नही जाते ख्वाबों से
वो हमको ही अब भुला रहे हैं
वो हमको ही अब भुला रहे हैं
माना कि चोट पहुँची तुम तलक
एहसास है तभी सहला रहे हैं
एहसास है तभी सहला रहे हैं
कदम-कदम पर मनाया है उन्हें
क्या दर्द है उन्हें जो इठला रहे हैं
कहता हूँ प्रेम से देखो एक बारक्या दर्द है उन्हें जो इठला रहे हैं
सोचो प्रभात क्यों चिल्ला रहे हैं
-प्रभात
-प्रभात
