कोई आभूषण हो तन में तेरी ज्योति छिन जाये
तुम हो जो
केवल मन में मेरे हौंसले बढ़ जाये
मैं सोंचू पल – पल तुझको तेरा रूप न हट पाये
ये होता है कैसे बिन देखे ही दर्शन मिल जाये
तेरी बात ही ऐसी, सोंचू तो चेहरा खिल जाये
मेरी उम्मीद और ताकत का अंदाजा लग जाये
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कोई
आभूषण......................................
कितनी भी हो उदास राते, स्वप्न खुशियाँ लाये
सुबह को जगने पर तेरा प्यार मिला नजर आये
कुछ पल न हो बातें साफ खामोशी दिख जाये
सोंचू मन से तो दो पल में मोती बन आसूं आये
खैर मेरी व्यथा व मेरा परिणाम, सब तुम ही हो
मेरी सफलता तब परिभाषा तुझको अर्पण हो
हरदम की खबरों में तेरा रूप विदित हो जाये
कोई
आभूषण....................................
-प्रभात
