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Wednesday, 19 October 2016

अब प्यार नहीं करना

गूगल से साभार 
जीते जी क्यों मरना
अब प्यार नहीं करना  

बहकर भावों की धारा में,
कवि बैरागी नहीं बनना
चाहत को क्यों लिखना,
देवदास ही क्यों बनना
अब प्यार नहीं करना  

इक मूर्त बना बस पूजना,
क्यों उसे हासिल करना
दीपक की लौ के आगे,
पतंगा बन क्यों जलना
अब प्यार नहीं करना  

अजीब सी ख्वाहिश ले,
सोते -सोते क्यों जागना
और सपनों में पीछा करते,
गले फिर से क्यों मिलना
अब प्यार नहीं करना  

शब्दों को संजीदा से लेकर,
सोंचेंगे क्यों दिल से अब
बातों-बातों में लड़ना और
हँसते-हँसते क्यों रोना,
अब प्यार नहीं करना  

इश्क का प्रस्ताव ले क्यों,
लव यू मन में बोलना
हृदय की गति बदलकर,
क्यों इजहार दिल की करना
अब प्यार नहीं करना  
-प्रभात