मेरे क़दमों पर चलने का मौका खो दिया तुमने
तुम्हारे साथ चलने को अब सौ बार सोंचूंगा
तुम्ही से प्यार किया था, तो तुम्हारे राह चला था मैं
तुम्हारी हर इक आदत को अपना ढाल लिया था मैं
मेरी हर बात को तुमने ऐसे हलके में लिया था
पतंगा जला शमां पर था, मजबूर किया था तुमने
अब इजहार प्यार करने को कभी दिल से न सोंचूंगा....
तुम्हारे साथ चलने को अब सौ बार सोंचूंगा
तुम्ही से प्यार किया था, तो तुम्हारे राह चला था मैं
तुम्हारी हर इक आदत को अपना ढाल लिया था मैं
मेरी हर बात को तुमने ऐसे हलके में लिया था
पतंगा जला शमां पर था, मजबूर किया था तुमने
अब इजहार प्यार करने को कभी दिल से न सोंचूंगा....
बड़ी चाहत में तुमको खुद के जैसे भाप लिया था मैंने
शरारत से बचाना, और इससे खुद जिद कर लिया था
अपनी हर ख्वाहिश को दफनाना ठान लिया था तुमने
नहीं कह कुछ, सागर को भी प्यासा कर दिया तुमने
अब कदम बढ़ाने की आगे किस राह से सोंचूंगा
मेरे क़दमों.....
-प्रभात
शरारत से बचाना, और इससे खुद जिद कर लिया था
अपनी हर ख्वाहिश को दफनाना ठान लिया था तुमने
नहीं कह कुछ, सागर को भी प्यासा कर दिया तुमने
अब कदम बढ़ाने की आगे किस राह से सोंचूंगा
मेरे क़दमों.....
-प्रभात