एक सफर ऐसा भी ......
एक जिक्र था मेरी साँसों में किसी के होने का
वो तो बस इसे सांस समझते रहे
न जाने कितनी कोशिशें की
दीवार खड़ी न हो मेरे हिस्से की
इसे भी वे कमजोरी समझते रहे...
#प्रभात
9-3-21