Thursday, 12 May 2016

असफल सिविल सर्विसेज ऐस्पीरैंट को समर्पित मेरा ख़त

“मेरा यह ख़त उन सभी असफल सिविल सर्विसेज ऐस्पीरैंट को समर्पित है जो अभी भी इस तैयारी में लगे हुए है.”
गूगल साभार 

मेरे प्यारे-प्यारे साथियों,
अभी कुछ दिनों पहले आपका रिजल्ट आया . मैंने देखा की आपकी खुशियाँ पहले जैसे बरक़रार है. शायद आपको अपने ऊपर भरोसा सा हो गया है कि डीएम बन कर रहेंगे. लाल बत्ती से ही चलेंगे. आपने वो कुर्सी साफ़ न की जिस पर आप बैठा करते थे और आप के मन में उत्साह भर आया कि मेरा दोस्त डीएम बन गया. जिलाधिकारी वो बना दोस्त है मेरा. कहाँ का? अरे वो दोस्तवा है जो उसके दोस्त है और जो उसके दोस्त है उसके भी वो दोस्त लगते है मतलब हमरे बहुत करीबी रहे.

इसलिए इस देश में सब एक दूसरे के सामने सीना ताने दिखाते रहते है कि दोस्त बना तो मुझे गर्व है. पर मुझे पता है साथियों असल बात ई है “ कि अन्दर से उबाल आ रहा है तोहरे अन्दर काहे कि ऊ बन गया और हम वही रहे अरे उसे तो हम कुछ दिन पहले अपने संविधान के नोटवा देके आये थे न दिए होते तोह खाक ऊ बन जाता” हम तो उससे पहले आये और अभी भी उसी कमरे में सड़ रहे. वही आये थे पंचवर्षीय योजना लेके अब तो सरकार भी चली गयी पंचवर्षीय योजना भी पर हम वही है.

असल में साथियों ये आप की बात ही नहीं है मैं तो पेशे से ख़त लिखने वाला ही रह गया हूँ आजकल मेरे खतों की चर्चा बहुत चल रही है शायद अब तो और भी. इसलिए मैं सार्वजानिक रूप से बोल रहा हूँ मुझे रिजल्ट सुनकर तो बहुत ही दुःख हुआ. अगर यह मेरा दोस्त कुछ साल पहले डीएम बन गया होता तो और भी दुःख होता. दुःख होता और सामने जब बधाई देकर आता तो लोग मुझे भी देखते और मैं बधाई देता तो मेरा दोस्त खुश होता और परन्तु मेरे चेहरे अन्दर की बात बताते ही....

दोस्त तुम ऐसे हो कि आज डीएम बने हो तो सुनो ऊपर की कुछ पंक्तियाँ मत पढना बस इतना सुनों की तुम्हारी सफलता के लिए तुम्हे ढेरों बधाई तुमने मेरे दिल की धड़कने बढा दी जब मैंने तुम्हारा नाम टॉपर्स की लिस्ट में देखा. मुझे लगा कि वाह मेरा दोस्त भी ऐसा कर सकता है तो मैं भी कर सकता हूँ. मेरा तो तुमने हौसला बढ़ा दिया अब तो तुम मेरे हीरो बन गए दोस्त अब तो तुम्हारी इज्ज़त और करनी पड़ेगी शायद इसलिए क्योंकि तुम्हारा नाम बड़े आदर से लिया जायेगा सच तो यह है कि तुम मेरे जैसे ही थे पर ........अक्ल तुममें कुछ ज्यादा था. एक कारण है उसका इसलिए हो गया क्योंकि वह बहुत पढता था. इसलिए आज से ही पढ़ने वाले बने हो, आज से गुरु मन्त्र देने वाले बने हो और आज से ही तुम्हारे फेसबुक पर फालोवर बढे है शायद आज तुम्हारी पहचान हुयी है तुम्हारे माँ बाप इसी दिन का इन्तजार करते थे. मेरा नाम चुपके से इंटरव्यू में अपने साथ रख लेना और मुझे अपना दोस्त कहना. आज मैं तुम्हे पार्टी भी दूंगा. पढ़ लिए डीएम साहब..क्यों भाई डीएम साहब बोल रहे हो? ऐसा प्रश्न भी नहीं पूछते सफल अभ्यर्थी वो तो सुनना भी पसंद करते है और एक दो बार टालेंगे कि नहीं तू ऐसे क्यों बोल रहा है. पर है तो वो सही में डीएम.

कुछ दिनों बाद पता चलता है युवा सफल अभ्यर्थी के पास आप चले जाते है और कहते है जिलाधिकारी से मिलना है. अर्दली कहता है साहब के पास टाइम नहीं है. अरे अर्दली साहब साहब के हम मित्र है. अच्छा रुको मैं बोल कर आता हूँ. साहब कह रहे है कि थोड़ी देर बाद मिल लीजियेगा. बैठ कर आप इंतज़ार करते है और साहब चले जाते है आपको पूछने का समय नहीं रहता अब दोस्त नहीं वह जिलाधिकारी है. धीरे धीरे एक दिन आप से मुलाकात हो ही जाती है साहब से क्योंकि मित्र नहीं अब आप अपने काम से मिलने जाते है और आप हाथ मिलाते है. वो हाथ मिला लेते है और मन ही मन सोंचते है कि कोई देखा क्या? और जब तू करके आप बात करते है तो आप दिल से अन्दर से सोंचते है कि ये डीएम भी नहीं बोल रहा मुझे. अब इसका काम अगली बार से नहीं करेंगे. अब आपका यह दोस्त डीएम तो बन गया परन्तु धीरे-धीरे रिश्ते भूल कर ऐसी स्थिति में आ गया कि परिवार भी भूल गया. वो अपनी गरीबी भूलकर गरीब को सता रहा होता है अब आप उसके दोस्त कहलाने में भी शर्म करने लगते है.

इसलिए सफल अभ्यर्थियों मेरी आपसे एक ही गुजारिश है अपने इन असफल अभ्यर्थियों को आप बधाई दे उनके भविष्य के लिए, कि वे आप के हमेशा दोस्त बने रहे जैसे अब तक. आप उनका हौंसला बढ़ाये अपने आप से हाथ मिलाये. आप उनकी बधाई स्वीकार करते हुए उनसे अपने आप गले मिले आप खोज खोज कर इनसे बात करे जो शर्म कर रहे है आप से बात करने के लिए. आप से बात करने के लिए वे तरस भी रहे है. वे चाहते भी है कि आप में मेरी दोस्ती को लेकर बदलाव न  हो. आप जैसे उनके साथ पढ़ते थे वैसे ही पढ़ें भी वैसे ही घूमें भी और अपनी स्थिति को ध्यान में रखें कि आपने यह सफलता किसके लिए पायी. क्यों आपने डीएम बनने का फैसला लिया था.

मेरे साथियों सच में आप ही सफल अभ्यर्थी हो और डीएम बन जाने से असफल ही कहे जाओगे क्योंकि आप भी वैसा ही करोगे जैसा कि अब तक और बहुत से अधिकारी करते आये है. चोरी, डकेती, छिनैती, बदमाशी और जितने भी गलत काम हो सकते है. नाम ही आपका डीएम रहेगा और आप में से कुछ को छोड़कर लगभग सभी यही काम करते है. ढंग थोडा अलग होता है. कुर्सी पर बैठकर करने की वजह से उनके कर्म आदर के साथ पुकारे जाते है. घोटाला, राजनीतिक दबाव, मेहनत, कुर्सी सौपने जैसे कुछ शब्दों का ही इस्तेमाल होता है.

मेरे प्यारे साथियों आप असफल कैसे हो? आपने तो पंचवर्षीय योजना भी पूरी कर ली है. आपने कभी आत्महत्या की योजना भी नहीं बनाई. आप सुबह से लेकर शाम तक पढ़ते रहे. आप जिस छोटे कोठरी में बैठे हो वहां तो पंखा भी नहीं है जबकि सूरज की गर्मी आपको बुखार भी नहीं दे पा रही है. आप बिना किसी से बात किये तनहा ही अपने आप से दिन रात सड़क पर चलते हुए बात करते है. आप के कमरे पर आपको खिचडी के अतिरिक्त कुछ सड़क के बर्गर खाने के लिए भी समय नहीं है. आप थोडा समय चाय के लिए निकालते है और सड़क पर मूल अधिकार के अनुप्रयोग भी बता डालते है.

आप ही बताईये इस भीषण गर्मीं में एक छोटे से कमरे में आपकी नित प्रतिदिन की सारी क्रियाये पूरी करते हुए संविधान की समस्त जानकारियाँ समेटे हुए जब आप किसी जगह पर खड़े होकर किसी सज्जन से बात करने लगते है तो लोग आपकी तरफ एक बार देखने लगते है . इसलिए क्योंकि आप सफल अभ्यर्थी हो. आप रात को केवल 6 घंटे सो पाते हो और उस 6 घंटे में ही एफ एम के न्यूज सुन जाते हो अपने डीएम बनने के दिन प्रति दिन के सपने में खोये रहते हो. ऐसा होने के बाद भी आप अपने आपको मेन्टेन करके चलते रहते हो. क्योंकि आप सफल अभ्यर्थी हो.

आप जब आये थे तो आप उस जगह से आये थे जहाँ पर स्कूलों में बैठने के लिए सीट नहीं थी. अध्यापक की जगह कुत्तों की उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज होती दिखती थी. आप इतिहास में गांधी को जानते भी थे तो केवल नोट देखकर. और अब आप विश्व के इतिहास में बोस्टन  टी पार्टी, समस्त महाद्वीपों की प्रमुख क्रांतियों को चुटकियों में बता जाते हो. अपने दीवाल पर टंगी भगवान् की फोटो का स्थान लिए वो विश्व मानचित्र में आप उंगली बढाकर यात्रा किया करते हो. इसलिए क्योंकि आप सफल हो.

जब आप राजव्यवस्था की बात करते हो तो सामने आता उच्चतम न्यायालय का वकील भी पूँछ लेता है कि आप कैसे हो कब से दे रहे हो सिविल का एग्जाम. आपके पास कोई प्रमाण पत्र नहीं होता परन्तु बेहिचक आप अपने अटेम्प्ट को वैसा ही बता देते है जो वास्तविक होता है. कितने गजब के हो मालिक आप तो राजा हरिश्चंद्र की तुलना अपने आप से कर सकते हो. आप आइन्सटीन  की तुलना भी कर सकते हो क्योंकि आप सीसेट की रीजनिग इतने चुटकियों में तब कर डालते हो जबकि आप आर्ट्स बैकग्राउंड से आते हो. वह भी सर्टिफिकेट में ही केवल ...... सच में आपने गुणवत्ता वाली शिक्षा पहले पायी ही नहीं.

आप भगत सिंह की तरह बनकर देश के लिए इतना कुछ न्योछावर कर देना चाहते हो कि वह आपका नाम भगत सिंह की तरह ही ले सके. आप यह सोंचकर इंटरव्यू देने जाते हो कि डीएम बनकर आप देश के लिए मर जाओगे. सच में आपकी अब तक की इसी सोंच ने आपको जिन्दा कर रखा है और कामयाब भी कहलाते हो. ये अलग बात है कि रिजल्ट में अच्छी रैंक आने के बाद अपनी वास्तविक स्थिति मतलब कायरता का प्रमाण पत्र आप मुझ जैसे असफल अभ्यर्थियों के सामने दे जाते है. सच में आपको दुःख होता है जब ये ऐसा काम करते है क्योंकि अब तक आपने यह सोंचा है कि भगत सिंह ही बनना है.

आपने मां बाप को देखा नही वर्षों हो गए और दादी दादा जी ऊपर चले गए उन्हें देखने के दिन ही आप अपना प्रतिस्पर्धी परीक्षा देने  के लिए किसी दूसरे राज्य की यात्रा ट्रेन की साधारण बोगी में कर रहे हो और आप उस टी. टी. के सामने झुककर पेनाल्टी न लग जाये इसका भरपूर प्रयास करते हो. आप अपने प्रबंधन के बारे में बिना मैनेजमेंट का कोर्स किये बहुत कुछ जानने लगे है. आपसे ज्यादा सफल अभ्यर्थी और कौन होगा. आप तो राम की तरह त्यागी भी है. आप परीक्षा देकर आते है और सुबह शाम उठते समय अपनी आधा प्रशाधन की क्रिया भी भूल जाते है. आप का रिजल्ट आते समय भी आप बड़े मनोयोग से पढ़ते है और असफल रहने के बाद भी बिना निराश हुए प्रगति के मार्ग पर चलते जाते है. आप तो अभी सफल है आपको विश्वास है पर डीएम बनने के बाद शायद आप न कहला सके.

इसलिए मेरे दोस्तों, आप अपने पर यकीं कीजिये आपको तो डीएम का भी आशीर्वाद मिलता है और मिलता रहेगा आपने अपने इस सफ़र में कुछ न कुछ सीखा ही है. आप जो कर रहे है वह हर किसी के बस की बात नहीं. आपकी चेतना अभी सुभाष चन्द्र बोस वाली है इसे जिन्दा रखना है भले ही आप इस परीक्षा के अंतिम पड़ाव तक जाकर वापिस पहली जगह पर आ गये हो या अभी तक शुरू से ही पहली वाली स्थिति में लटके पड़े हैं. आप है तो दुनिया है आप नहीं तो तो ये दुनिया भी नहीं आप ही युवा है आप ही डीएम है और आप ही नेता आप ही सर्वस्व है बस अपने आप को पहचान कर इसी तरीके से चलते रहिये ..........
आपको

आपके प्यारे इस दोस्त प्रभात का नमन 

6 comments:

  1. वाह, बहुत ही सुंदर प्रस्‍तुति दी है आपने। आपकी बात में बहुत दम है। कई विचारणीय बातें भी सामने आई हैं। सचमुच बहुत ही अच्‍छी पोस्‍ट है।

    ReplyDelete
    Replies
    1. शुक्रिया आपके प्रोत्साहन के लिए....आपने पढ़ा, अच्छा लगा

      Delete
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (14-05-2016) को "कुछ जगबीती, कुछ आप बीती" (चर्चा अंक-2342) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद मेरी पोस्ट का लिंक देने के लिए..साभार

      Delete

अगर आपको मेरा यह लेख/रचना पसंद आया हो तो कृपया आप यहाँ टिप्पणी स्वरुप अपनी बात हम तक जरुर पहुंचाए. आपके पास कोई सुझाव हो तो उसका भी स्वागत है. आपका सदा आभारी रहूँगा!