Sunday, 9 July 2017

मोहब्बत पड़ी है तुमको !!


-Google

खूबसूरत नजारा और नजारे आसमां पर
सितारे भी मुझसे कुछ कह रहे हैं
कभी तुम पास आओ गले से लगा लूंगा
तुम्हारी ख्वाहिशें सब चुरा लूंगा
तुम्हारी जरूरत है हमको
मोहब्बत पड़ी है तुमको!!

अभी तक तुमने जो भी कुछ किया
मोहब्बत ने तुमको अंधा किया
तुम्हारी परवाह तुमको खुद की नही है
तो तुम्हें कैसे भरोसा वफ़ा क्या करेगा
तुम्हारी जरूरत है हमको
मोहब्बत पड़ी है तुमको!!

है चादर में लिपटी जहाँ है सारा
सूरज की बाहों में लिपटा किनारा
है काले मेघों का ऊपर सहारा
लड़े जा रहे हो आपस में, मैं हारा
तुम्हारी जरूरत है हमको
मोहब्बत पड़ी है तुमको!!

बहुतों ने किया है अंत रिश्तों का
तुमने भी जिया है सार जिंदगी का
यकीं न हो खुद पे तो भी संभलना
चौराहों पे आके तुम न भटकना
तुम्हारी जरूरत है हमको
मोहब्बत पड़ी है तुमको!!

-प्रभात

6 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (11-07-2017) को चर्चामंच 2663 ; दोहे "जय हो देव सुरेश" पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. मेरे सवालों के दायरे में जब वो होती है तो उसका मन भी मेरी बातों में उलझने लगता है वह मुझे बहलाकर झट से बाहर हो जाती है मुझे पता है उसका दिल भी मेरी तरह मासूम है

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    1. वाह क्या जज्बात और गहरे ख्याल है ...शुक्रिया

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