Friday, 17 February 2017

वो अजब रात

वो अजब रात याद आते रहे

शब्द बुनते रहे यूँ सुनाते रहे
बात होती रही तुम पास आते रहे
फोन कट गया लगा फोन आते रहे
वो अजब रात ...
प्यार में गले लगते लगाते रहे
नींद को तुमसे बाँट लेते रहे
बात होने के बाद राह तकते रहे
वो अजब रात...
हुई बातें सोंचकर मुस्कुराते रहे
इश्क़ में तुमसे जुड़े जाते रहें
दोस्त कहकर फिर रुलाते रहे
वो अजब रात...
-प्रभात
(20/01/17)
तस्वीर गूगल साभार

3 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (19-02-2017) को
    "उजड़े चमन को सजा लीजिए" (चर्चा अंक-2595)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  2. सच ऐसे भाव भी मन में कहीं न कहीं छुपे ही रहते हैं....बहुत बढ़िया रचना

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