Monday, 6 April 2015

तुम्हारी राह देखने तक का नशा है..




"वही प्यारी खुशबू वही प्यार का नशा है

कोई लता चढ़कर मेरे रूह तक बसा है

मैं बांस* हूँ, पुष्प आने तक का नशा है 

तुम्हारी राह देखने तक का नशा है......"



*अधिकतर बांस का फूल जीवन में एक बार आता है और फल आते ही बॉस अपना जीवन समाप्त कर लेता है!

-प्रभात 

11 comments:

  1. हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार (07-04-2015) को "पब्लिक स्कूलों में क्रंदन करती हिन्दी" { चर्चा - 1940 } पर भी होगी!
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. यहाँ पहुँचने के लिए शुक्रिया सु-मन जी....

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद!

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  4. बहुत ही शानदार रचना।

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद!

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