Friday, 27 February 2015

विनती!

                            विनती










नवजीवन वाली खुशियाँ लेकर नया सुप्रभात हो  
आज और कल की बातों को भूल नया विहान हो  1।  

गरिमामय जिन्दगी की फिर नयी शुरुआत हो  
नयी चांदनी और तारों के साथ का शाम हो ।2। 
   
फिर से चिड़ियों का बसेरा मेरे आँगन के साथ हो  
फूलों से घिरा मकान और अच्छे लोगों की बात हो 3। 

साथ खेलनें वालों का जीवन भर साथ हो  
कटुता और कपटता वाली भाषा का सदा नाश हो  4।  

झूमें गायें और संग में खाने का इंतजाम हो  
आसमान में चिड़ियों की तरह उड़ने की बात हो  5।  

धर्म और प्रेम के बंधन में बंधी न ये नाव हो  
डूबते नाव को किनारे पर लाने का कुछ ज्ञान हो  6।   
                                                                 -“प्रभात”


16 comments:

  1. सार्थक प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (28-02-2015) को "फाग वेदना..." (चर्चा अंक-1903) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति...

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  3. बेहतरीन प्रस्तुति।

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    1. बहुत-बहुत शुक्रिया सर!

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  4. Replies
    1. बहुत-बहुत शुक्रिया!

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  5. आज 01/मार्च/2015 को आपकी पोस्ट का लिंक है http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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    1. बहुत आभारी हूँ!!

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  6. बहुत सुन्दर भावपूर्ण

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