Saturday, 12 July 2014

केवल चेहरा उतरा सा और गगन सूना सा होगा।


वो दिन भी क्या होगा
जब सूरज कहीं और होगा
सुबह न होगा, ना होगी शाम
केवल चेहरा उतरा सा और गगन सूना सा होगा

उन तारों का क्या होगा
जो झिलमला कर दिख जाते थे
न सतरंगी दुनिया होगी, ना होगा चाँद
बस यादों का एक गुलदस्ता और बिखरी सी बातें होंगी

चहचहाना चिड़ियों का कहाँ होगा
जब नीर धरा पर बदला सा होगा
न वे वन होंगे, ना उनकी सुन्दर लकड़ियाँ
बस सूखी घासें और उनके पुष्प गिरे से होंगे

उन घरों का क्या होगा
जहाँ सूरज कभी निकला रहा होगा
न वो हंसी होंगी, ना हंसनें का कारण
केवल पन्नों में लिखी बातें और उनका आत्ममंथन होगा

वो चेहरे कैसे बदले होंगे
जो कभी रोये और कभी हँसे होंगे
सैकड़ों आँखे तब नम होंगी
बस एक आईना होगा और उसमें "प्रभात" और उसकी ये कविता होगी
                                 -"प्रभात"

35 comments:

  1. सुंदर प्रस्तुति , आप की ये रचना चर्चामंच के लिए चुनी गई है , सोमवार दिनांक - १३ . ७ . २०१४ को आपकी रचना का लिंक चर्चामंच पर होगा , कृपया पधारें धन्यवाद !

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  2. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति !
    नई रचना मेरा जन्म !

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    सुधरा हुआ लेखन।

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  4. वाह प्रभात जी ... आपकी कवितायें चमकती रहें ... गर्दिश के दिन कभी न आयें ...

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  5. सुन्दर प्रस्तुति।

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  6. बढ़िया प्रस्तुति

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  7. Well Writtens,

    HI I Am new in Creative Writing Please go through my blog

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    1. बहुत ही अच्छा लगा आपकी रचनायें पढ़कर ....आभार!

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  8. http://swayheart.blogspot.in/search?updated-min=2014-01-01T00:00:00-08:00&updated-max=2015-01-01T00:00:00-08:00&max-results=2

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  9. कल 18/जुलाई /2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  10. वाह क्या बात है प्रभात जी। बहुत ही बढ़िया

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    1. सादर आभार स्मिता जी!

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  11. Bahut sunder rachna Prabhat ji..... Shubhkamnaayein

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    1. बहुत धन्यवाद लेखिका जी!

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  12. Replies
    1. शुक्रिया सर यहाँ तक आने के लिए!

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  13. अनूठे भाव, मंगलकामनाएं आपको !

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया!

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