Monday, 22 October 2012

अपना विचार- मेरा काम नहीं की मैं रूक कर तुम्हें समझाने लगूँ, ये तुम्हें देखना है और इस कदर होना है; कि तुम मेरी तरह न होकर, तुम खुद समझ कर किसी और को समझानें लगो!



मुझे देखकर इतने सहमे हो,
की खुद की कीमत को दांव लगाने जा रहे हो.

किस गली जाना है, ये मेरा पग बताता है,
क्या सोंच है किसका, ये मेरा तजुर्बा है
मेरी परिस्थिति मुझे किसी रास्ते चला रही है,
और इसी को तुम भी अपनाये जा रहे हो??

लगन किताबों में नहीं तो मुझे देख लिया,
मैं किताबों में नहीं, तो भी कहीं दिख गया,
इसी वजह से तुम रुक कर दिया जला लिए,
और ऐसे दिनचर्या को सदा बनाये हुए हो??

थका देह नींद ले कर के आ गया,
कुछ पल उठा, और फिर खा कर सो गया,
तुम्हारी निगाहें कहीं मुझ पर पड़ गयीं,
और तुम बिना खाए रात बनाये हुए हो??

सीखना था पढ़ना, लिखना भी सीख गए,
अपने दिमाग से न्याय लेना व देना सीख गए,
तुम्हे तुम्हारी किस्मत ने बिजनेस, में लगा लिया,
और अब तुम हवेली को गिरवी रखने जा रहे हो??

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