Wednesday, 16 January 2019

कुछ बोलो तो भी दिक्कत


तुम्हारे पास मैं बैठा हूँ, फासले बहुत हैं मगर
कुछ बोलो न तो दिक्कत, कुछ बोलो तो भी दिक्कत
अजीब सी चाहत है, बहुत दूर जा रहा ये डगर
कुछ दूर जाकर भी दिक्कत, वहीं बैठकर भी दिक्कत
खामोशियाँ खुलकर सामने आ भी जाएं अगर
कुछ तुम्हारी नजर में दिक्कत, कुछ मेरी वजह से दिक्कत
प्रभात


7 comments:

  1. नमस्ते,

    आपकी यह प्रस्तुति BLOG "पाँच लिंकों का आनंद"
    ( http://halchalwith5links.blogspot.in ) में
    गुरुवार 17 जनवरी 2019 को प्रकाशनार्थ 1280 वें अंक में सम्मिलित की गयी है।

    प्रातः 4 बजे के उपरान्त प्रकाशित अंक अवलोकनार्थ उपलब्ध होगा।
    चर्चा में शामिल होने के लिए आप सादर आमंत्रित हैं, आइयेगा ज़रूर।
    सधन्यवाद।

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  2. खामोशियाँ खुलकर सामने आ भी जाएं अगर
    कुछ तुम्हारी नजर में दिक्कत, कुछ मेरी वजह से दिक्कत
    नमन , इन भावपूर्ण पंक्तियों के लिये..
    सभी को सुबह का प्रणाम,अच्छी रचनाओं से भरा उम्दा अंक।


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  3. वाह! बहुत बढ़िया।

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  4. वाह्ह्ह... लाज़वाब👌

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