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Saturday, 22 September 2018

यहीं नहीं ठहरना है


अभी दूर तक चलना है
यहीं नहीं ठहरना है
सफर तो अभी शुरू हुआ है
आसमां में बादलों को देखो
उन्हें गरजना हो या तड़पना हो
ठहर कर फिर बरसना है
पानी फिर से भरना है

अभी दूर तक चलना है।
रात अंधेरी हो कितनी
तारों को टिमटिमाते हुए देखो
बादलों में छुपते हुए देखो
छुप छुप कर बाहर निकलना है
जुगनुओं को झिलमिलाते हुए देखो
रुकना है मगर चमकना है
रात बीतने तक जगना है
अभी दूर तक चलना है
नदियों के हौसलों को देखो
पहाड़ों पर बर्फ पिघलते हुए देखो
समंदर में तरंगों को देखो
उनका बनना और बिगड़ना जारी है
सिलसिला अनवरत जारी है
कभी नहीं ठहरना है
हमेशा खुद में मगन रहना है
अभी दूर तक चलना है
-प्रभात
तस्वीर: गूगल साभार