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Friday, 27 February 2015

विनती!

                            विनती










नवजीवन वाली खुशियाँ लेकर नया सुप्रभात हो । 
आज और कल की बातों को भूल नया विहान हो । ।1।  

गरिमामय जिन्दगी की फिर नयी शुरुआत हो । 
नयी चांदनी और तारों के साथ का शाम हो । ।2। 
   
फिर से चिड़ियों का बसेरा मेरे आँगन के साथ हो । 
फूलों से घिरा मकान और अच्छे लोगों की बात हो । ।3। 

साथ खेलनें वालों का जीवन भर साथ हो । 
कटुता और कपटता वाली भाषा का सदा नाश हो । ।4।  

झूमें गायें और संग में खाने का इंतजाम हो । 
आसमान में चिड़ियों की तरह उड़ने की बात हो । ।5।  

धर्म और प्रेम के बंधन में बंधी न ये नाव हो । 
डूबते नाव को किनारे पर लाने का कुछ ज्ञान हो । ।6।   
                                                                 -“प्रभात”