अपनी मंजिल और आपकी तलाश
एक सफर ऐसा भी ......
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जी रहा हूँ जिंदगी अब जुल्फ के साये में
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Monday, 23 September 2019
जी रहा हूँ जिंदगी अब जुल्फ के साये में
जी रहा हूँ जिंदगी अब जुल्फ के साये में
वो रात खुशनुमा शान थी अदाओं में
हसरतें मिट गईं
,
चाहत का इम्तहान हो गया
अजनबी बनकर रहे किस्सों में विहान हो गया
चल पड़ी है जिंदगी किसी और पेड़ की छांव में
लेकिन उसी का इंतजार है अभी अपनी राहों में
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प्रभात
Prabhat Prabhakar
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