मेरी आँखों में तेरी इक तस्वीर नजर आये
ये आँखे नम इतनी है पर तूँ साफ़ नजर आये
यही एक बात की उलझन दिन रात सता रही है
मैं जितना दूर हूँ तुमसे तू उतनी करीब नजर आये
मैं जितना दूर हूँ तुमसे तू उतनी करीब नजर आये
कोई इक बात नहीं जो मुझसे दूर हुआ हो अब तक
मंजिल दूर बहुत है लेकिन फासलें कम नजर आये
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प्रभात
मंजिल दूर बहुत है लेकिन फासलें कम नजर आये
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प्रभात