Thursday, 7 December 2017

पिताजी, इस कदर मुझे डर है

पिताजी, इस कदर मुझे डर है
आपके न होने का
कि मैं मर्जी से शादी करने की जिद
छोड़ देती हूं
मैं अपनी सारी खुशियों को
आपके सहारे छोड़ देती हूं
आपकी खुशी के लिए
क्योंकि जानती हूँ बेटियाँ 
शायद सब कुछ नहीं कर सकतीं
अगर कर भी सकती हैं तो 
शादी के लिए रिश्ते आप ही ढूंढेंगे
मैं अगर ढूंढ़ भी लूंगी
तो मुझे त्यागना पड़ेगा,
अपने प्रियतम को
अपने बंधनों को
अपनी खुशियों को
और अपने बचपने को
और सबसे बड़ी बात
मुझे कठोर बनना पड़ेगा
दिल और दिमाग दोनों से
मुझे असर नहीं करेंगी
ठंडी और गर्म हवा
जीवनरूपी रंगमंच पर
किरदार निभाऊंगी 
चेहरे पर खुशी होगी
अंदर से टूटी नहीं दिखूंगी
लेकिन मैं 
असंवेदनशील बन जाऊंगी......

प्रभात
तस्वीर: गूगल साभार



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